कपड़ा उद्योग के अधिकतर श्रंखला की जीएसटी 5 फ़ीसदी बरकरार रखने की मांग

ज्योति दुबे
नवी मुंबई।जीएसटी परिषद की हालिया बैठक में केंद्र सरकार ने जनवरी 2022 से कपड़ा क्षेत्र से उल्टे शुल्क ढांचे को हटाने का और कपड़ा उद्योग पर जीएसटी को 5 % से बढ़ाकर 12 % करने का फैसला किया है। इस विषय में कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट)ने देश भर से कपड़ा उद्योग से जुड़े हुए संगठनों से  सुझाव मंगवाए थे जिसमें अधिकतर संगठनों द्वारा जीएसटी की दर 5 % बरकरार रखने पर सहमति हुई है लेकिन बशर्ते उल्टे शुल्क ढांचे को भी बरकरार रखे जाने की जानकारी कैट के महानगर अध्यक्ष एवं अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष  शंकर ठक्कर ने  दी ।

आगे कहा कपड़ा उद्योग में भुगतान की शर्तें छह महीने से भी अधिक समय तक की होती है। इसके अलावा उधारी का समय लंबा होने से खरीदार पार्टियों के पलायन के मामले होते हैं तो ऐसे में विक्रेता पार्टी का  पैसा डूब जाता है। यदि ऐसी परिस्थितियों में उल्टे शुल्क ढांचे को हटा दिया जाता है, तो व्यापारियों को अपना पैसा डाल कर बकाया चुकाना होगा। इसके अलावा जीएसटी कर ढांचे में बदलाव से बुनाई उद्योग धराशायी हो सकता है । बुनकर उद्योग का एक ही कहना है कि जीएसटी कर ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।

 कैट के महानगर महामंत्री तरुण जैन ने कहा कि अगर उल्टे शुल्क ढांचे को बदलना है तो कपड़ा उद्योग की पूरी श्रृंखला का ढांचा सिर्फ 5 फीसदी होना चाहिए।  विशेष रूप से व्यापार और खुदरा विक्री कपड़ा उद्योग में सबसे अधिक रोजगार प्रदान करती है। अगर जीएसटी कर ढांचे में बदलाव किया गया तो अंतिम उपभोक्ता के लिए कपड़े और महंगे हो जाएंगे और छोटे व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होगा। व्यापारियों की बिक्री घटेगी और पूरा कपड़ा उद्योग धराशायी हो जाएगा। सरकार को कर की दरें ऐसे निर्धारित करनी चाहिए ताकि उपभोक्ता को वस्तु सस्ती मिल सके।

कैट के महानगर वाइस चेयरमैन दिलीप माहेश्वरी ने कहा कि पूंजीगत वस्तुओं पर जीएसटी वर्तमान में उलटे शुल्क ढांचे के कारण वसूल नहीं किया जा सकता है। इस वजह से भारत वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी नहीं हो सकता है। इसलिए उल्टे ड्यूटी स्ट्रक्चर को हटाया जाना चाहिए ताकि पूंजीगत वस्तुओं पर लगने वाले जीएसटी की वसूली की जा सके।

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  • jyoti Dubey
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